- गुप्ता कोल वाशरी घोटाला : MSMC के चहेतों से छीनकर कैसे बांटा अपनों को ?

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गुप्ता कोल वाशरी घोटाला : MSMC के चहेतों से छीनकर कैसे बांटा अपनों को ?

विद्वान पत्रकार शब्बीर सिद्दीकी और प्लांट मैनेजर संजय सारगे में क्या है कनेक्शन ?

बैंक खाते और कॉल डिटेल खंगालने पर करोड़ों की हेराफेरी का होगा पदाफार्श

खबरें छापने के बाद गुप्ता कोल वाशरी किस तरह से सिद्दीकी पर हुआ मेहरबान ?

पुलिस, LCB, SID, CID, ED, WCL का विजलेंस प्रशासन व आयकर विभाग के लिए बड़ी चुनौती

@चंद्रपुर
गुजरात में 6 हजार करोड़ का कोयला घोटाला उजागर होने के बाद चंद्रपुर के WCL के खदानों से इसका सीधा कनेक्शन जुड़ा। यहां के कोल वाशरी देश के इस महाघोटाले में लिप्त होने के अनेक पुख्ता प्रमाण मिले हैं। वर्तमान में गुप्ता कोल वाशरी की कारगुजारियां बेहद ही चौंकाने वाले हैं। जुलाई-2021 में गुप्ता कोल वाशरी के महाघोटाले पर्दाफाश विद्वान पत्रकार शब्बीर सिद्दीकी ने अपनी खबरों के माध्यम से किया। हालांकि यह अलग बात है कि 11 जिलों के विदर्भ विशेष प्रतिनिधि शब्बीर को अपने ही शहर घुग्घुस का नाम भी ठीक से लिखना नहीं आता। लेकिन उनकी खबरों के प्रकाशित होने के समय प्लांट मैनेजर संजय सारगे जो शब्बीर को जानते तक नहीं थे, वे व उनकी कंपनी ने शब्बीर के बड़े भाई नसीम मुक्तार अहेमद सिद्दीकी और उनके पार्टनर अखिलेश उर्फ पंडित औधेश मिश्रा को 50 हजार मीट्रिक टन का कोल DO परिवहन का ठेका प्रदान कर दिया।
महाघोटाले को उजागर करने वाले शब्बीर सिद्दीकी नामक इस विद्वान पत्रकार की खबरों के बाद उनके ही बड़े भाई को करोड़ों का ठेका मिलना भी एक महाघोटाले की ओर इशारा करता है। इसलिये गुप्ता कोल वाशरी के प्लांट मैनेजर संजय सारगे व शब्बीर सिद्दीकी समेत इस मामले से जुड़े सभी लोगों के बैंक खाते एवं कॉल डिटेल खंगालने पर जांच एजेंसियों को अनेक धांधलियों के राज उजागर करने में मदद मिलेगी। पुलिस, LCB, SID, CID, ED, WCL का विजलेंस प्रशासन व आयकर विभाग के लिए यह एक बड़ी चुनौती के रूप में अब देखा जाने लगा है।

प्लांट मैनेजर संजय सारगे की भूमिका संदेह के घेरे में?

गुप्ता कोल वाशरी के प्लांट मैनेजर संजय सारगे एक सामान्य परिवार से आते हैं। घुग्घुस निवासी व मूलत: यवतमाल जिले के निवासी सारगे जुलाई-2021 में कोयला व कोल वाशरी से जुड़ी खबरों के लिये अपना स्टेटमेंट देते हुए सुविख्यात पत्रकार शब्बीर सिद्दीकी को नहीं जानने का दावा किया करते थे। नागपुर के सप्रा ट्रांसपोर्ट का कोयला ठेका कम कर पत्रकार शब्बीर सिद्दीकी के बड़े भाई को ठेका देने की गुप्त नीति के पीछे सारगे का अहम रोल होने की चर्चा है। चर्चा तो यह भी है कि गुप्ता कोल वाशरी के संचालकों को गुमराह करने के लिये सारगे की ओर से खुफिया जानकारी लिक की गई और एक सोची समझी रणनीति के तहत सप्रा ट्रांसपोर्ट को मिलने वाले ठेकों में बाधा निर्माण किया गया। कहा जाता है कि सिद्दीकी बंधुओं को ठेका दिलाने के लिये गुप्ता कोल वाशरी से जुड़े अनेक खुफिया राज पत्रकार शब्बीर तक जानबूझकर पहुंचाये गये। हालांकि जांच एजेंसियों की ओर से जांच करने पर ही इसकी सत्यता उजागर हो सकती है। इसलिये पुलिस, LCB, SID, CID, ED, WCL का विजलेंस प्रशासन व आयकर विभाग की ओर से इस महाघोटाले से जुड़े सभी लोगों के बैंक खाते एवं कॉल डिटेल की जांच करना जरूरी है।

पत्रकार शब्बीर के लिए गोरखधंध, बड़े भाई नसीम के लिये चंगा ?

जाने-माने पत्रकार व विदर्भ विशेष प्रतिनिधि कहे जाने वाले शब्बीर सिद्दीकी के अनुसार उन्होंने कोयला का काला खेल खेल रही वाशरी के घोटालों को पूरजोर ढ़ंग से पर्दाफाश किया। उनकी खबर में 3 बार इस काले कोयले के खेल को गोरखधंधा के तौर पर स्थापित किया गया। कोयले का काला खेल खेल रही वाशरी शिषर्क वाली न्यूज में उन्होंने इस महाघोटाले को गोरखधंधा शब्द से 3 बार संबोधित किया। लेकिन कुछ ही माह बाद इसी गोरखधंधे से जुड़े 50,000 मीट्रिक टन कोयला परिवहन का ठेका शब्बीर के बड़े भाई नसीम व उनके पार्टनर पंडित को गुप्ता कोल वाशरी की ओर से दिया गया। इसके चलते प्रकाशित खबरें और हकिकत में काफी अंतर नजर आ रहा है।

कोराड़ी, भुसावल व CSTPS को भेज रहे मिलावटी कोयला

कोयले का काला खेल खेल रही वाशरी की खबर में चंद्रपुर एवं यवतमाल जिले में WCL से महाजनको को कोयले की खेप पहुंचाने की जिम्मेदारी हिंद मिनरल्स(50 प्रतिशत), आर्यन कोल बायफिक्रेशन(30 प्रतिशत) एवं रूकमाई इंफास्ट्रकचर प्राइवेट लिमिटेड (20 प्रतिशत) का होने की जानकारी है। चंद्रपुर जिले के घुग्घुस एवं वणी में स्थित कोल वाशरी में कोयले को वॉश करने के बाद विमला व वणी की रेल साइडिंग से महाजनको को पहुंचाने के काम में बड़े पैमाने पर मिलावट का खेल खेला जा रहा है। मिलावटी कोयला कोराड़ी, भुसावल व CSTPS के पॉवर प्लांट को भेजा रहा है।

महाजेनको को घटिया कोयला, अच्छा कोयला वणी के मंडी में

मशहूर पत्रकार शब्बीर सिद्दीकी के अनुसार महाजेनको का अच्छे ग्रेड का कोयला रोजाना वणी के कोयला मंडी एवं राज्य के विभिन्न हिस्सों में भेज दिया जाता है। घुग्घुस के कोल डिपो व वणी कोल डिपो से वणी व विमला रेल साइडिंग पर घटिया कोयले को मिश्रित कर महाजनको के लिये रवाना किया जाता है।

कोल वॉश करने के नाम पर कैसे करते हैं मिलावट ?

कोयले के इस महाघोटाले में WCL के निलजई, मुंगोली, गोरेगांव पवनी-2, मकरधौकडा, सास्ती खदानों का वणी एवं घुग्घुस में स्थित कोल वाशरी में पहुंचता है, जहां पर उसे वॉश करने के नाम पर मिलावट करने का खेल-खेला जाता है। जिस ग्रेड का कोयला थर्मल पॉवर प्लांट(महाजेनको) को जाना चाहिए, वहां मिश्रित कोयले को भेजा जा रहा है। कोयले का पूरा गोरखधंधा लंबे अर्से से संचालित किया जा रहा है। WCL की विभिन्न माइंसों से कोयला निकलकर पहुंचता जरूर है, लेकिन अच्छी क्वालिटी के कोयले को बाहर बेच दिया जाता है एवं  मिलावटी कोयले को महाजनको के लिये रवाना कर दिया जाता है। विभिन्न कोयला खदानों से महाजनको भेजने के लिये कोयला उठाया जाता है और उसे अलग-अलग वाशरी में लाया जाता है। जिसके बाद कोयले में मिलावट की जाती है और अच्छे कोयले को रोजाना वाहनों के माध्यम से कोयला मंडियों में ऊंचे दामों पर बेच दिया जा रहा है।

मशहूर पत्रकार शब्बीर सिद्दीकी पर कैसे मेहबान हुए मैनेजर संजय सारगे ?

घुग्घुस के गुप्ता कोल वाशरी के प्लांट मैनेजर संजय सारगे का जब मशहूर पत्रकार शब्बीर सिद्दीकी ने इंटरव्यू-स्टेटमेंट लिया था, तब सिद्दीकी लिखते हैं कि संजय सारगे को खदानों से कितना कोयला प्लांट में आ रहा है व कहां जा रहा है, इसकी कोई जानकारी नहीं है। अभी वे माइंस में व्यस्त हैं। आप(शब्बीर सिद्दीकी) आकर उनसे मिले, वे आपको(शब्बीर सिद्दीकी को) जानते नहीं हैं। लेकिन लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद शब्बीर के बड़े भाई नसीम व उनके पार्टनर पंडित को 50,000 मीट्रिक टन कोयला परिवहन का ठेका गुप्ता कोल वाशरी की ओर से दिया जा चुका हैं। अब इस धंधे को शब्बीर सिद्दीकी द्वारा गोरखधंधा कैसे व क्यों करार दिया गया था, यह समझ से परे हैं।

खुद की वाशरी नहीं, फिर भी 22 लाख टन का दिया ठेका !

विद्वान पत्रकार शब्बीर सिद्दीकी के अनुसार महाराष्ट्र स्टेट माइनिंग कॉरपोरेशन(MSMC) ने अगले 10 वर्षों के लिए केवल 2 बड़े कोल वाशरीज और उनके 4 सहयोगियों के लिये 22 लाख मीट्रिक टन कोयले का ठेका दिया है। जबकि इन सहयोगी कंपनियों के पास खुद की वाशरी तक नहीं है। इस ठेके के लिये संबंधित विभाग ने अपने मुख्य शर्तों में बदलाव करने की जानकारी उजागर की है। गत अगस्त 2019 में एमएसएमसी ने छत्तीसगढ़, ओडिशा और महाराष्ट्र में खदानों से प्राप्त होने वाले 22 लाख टन कोयले की धुलाई के लिए निविदाएं आमंत्रित की थी। इसे भरने की अंतिम तारीख 6 सितंबर थी और इसे खोलने की तारीख 9 सितंबर थी। 12 सितंबर से चुनावी आचारसंहिता लागू होने की संभावना को देखते हुए इन तारीखों का चयन किया गया था। मूल निविदा की शर्त के अनुसार निविदा शुल्क 5 लाख एवं इएमडी एक लाख टन के लिए 3 करोड़ रुपये तय की गई थी। कम से कम 2 लाख टन कोयला धोने की वार्षिक क्षमता इसमें तय थी और केवल एक कंपनी को ही निविदा देने की अनुमति दी गई थी। लेकिन बाद में 6 कंपनियों के लिए माइनिंग कॉर्पोरेशन द्वारा सभी चारों पात्रता के मानदंडों को बदल दिया गया।

अगले पार्ट में :-

(खुद की वाशरी नहीं, फिर भी कैसे दे दिया गया 22 लाख टन का ठेका, गुप्ता कोल वाशरी में कैसे हुए घोटाले, किन-किन नीतियों के बल पर पत्रकार के रिश्तेदार हो रहे मालामाल, वाशरी कैसे मुंह बंद कराने के लिये बांट रही कोल DO, खबरें प्रकाशित कर कैसे पाएं जा रहे हैं करोड़ों के DO आदि विषय पर विस्तार से खबरें पेश करेंगे)

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