- कलेक्टर साहब ! ये प्यास कितने करोड़ों की है कि बुझती ही नहीं !

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कलेक्टर साहब ! ये प्यास कितने करोड़ों की है कि बुझती ही नहीं !

चंद्रपुर जिले में 208.66 करोड़ खर्च, बावजूद 602 गांवों में जलसंकट

पानी की तरह बहा रहे पैसा, फिर भी ग्रामीण रह गया प्यासा

@चंद्रपुर
मंत्री आते हैं, बैठकें लेते हैं, काजू-बादाम का स्वाद चखते हैं, उनके टेबल पर मिनरल वॉटर की थंडी बोतलें भी परोसी जाती हैं। एसी के ठंडे कमरों में घंटों तक अधिकारियों के साथ बैठकें लेकर जिले की समस्या निपटाने का दावा किया जाता हैं। यह दृश्य जिलाधिकारी कार्यालय के नियोजन भवन में अक्सर देखा जा सकता है। वहीं बीते 2-3 सालों में जलसंकट पर करोड़ों की राशि देकर हजारों योजनाओं को मंजूरी दी गई। इसके बावजूद वर्तमान में चंद्रपुर जिले के 602 गांवों में भीषण जलसंकट हैं।
खास बात यह है कि – जिले में इस बार नागभीड़ तहसील के मोहाड़ी मोकासा गांव के अलावा जिवती तहसील के पहाड़ियों पर बसे 24 गांवों में जिला प्रशासन की ओर से टैंकर लगाने का नियोजन किया गया है। आजादी 75 सालों में हजारे जिले के नेताओं और अफसरों ने कैसी प्रगति की है कि इन गरीब आदिवासियों तक जलापूर्ति की स्थायी योजना भी नहीं पहुंच पायी हैं ? यह अत्यंत गंभीर और चिंतन का विषय है।

“कलेक्टर अजय गुल्हाने साहब ! जिले में 208.66 करोड़ खर्च करने के बावजूद 602 गांवों में जलसंकट की यह नौबत क्यों है ?”

प्रशासन ने कहां-कहां कितने करोड़ खर्च किये ?

सरकारी आंकड़ों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि जिले में जलापूर्ति व जलसंचयन को लेकर बेतहाशा निधि खर्च की गई। करोड़ों की धन राशि को पानी की तरह बहाया गया। संभावित जल संकट कृति प्रारूप योजना के तहत वर्ष 2020-21 में प्रशासन ने जिले के 1040 गांवों के लिये बनाई गई अस्थायी 1333 योजनाओं पर कुल 14 करोड़ 96 लाख 55 हजार रुपये फूंक डाले। इसी तरह से वर्ष 2019-2020 के लिये प्रशासन ने अस्थायी उपायों के लिए जिले के 1206 गांवों के लिये बनाई गई 1488 योजनाओं पर 23 करोड़ 54 लाख 19 हजार रुपये खर्च कर दिये। स्थायी योजनाओं की बात की जाएं तो बीते अनेक वर्षों में इतने करोड़ की निधि खर्च कर दी गई कि उसका आंकड़ा देखकर ही हर नागरिक चौंक जाएं। जल जीवन मिशन नामक योजना पर प्रशासन ने 19 करोड़ 10 लाख 65 हजार रुपये खर्च कर दिये। वहीं मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम पर प्रशासन की ओर से 6 करोड़ 21 लाख 89 हजार रुपये खर्च किये गये। जबकि जिला खनिज प्रतिष्ठान की ओर से जिले में 691 जलापूर्ति योजनाओं के लिये 19 करोड़ 48 लाख 34 हजार रुपये की धन राशि खर्च कर दी गई। इसके अलावा जिले में जलसंचयन व तालाब गहराईकरन जैसे विषयों पर तो बेहिसाब धन खर्च किया गया। एकमात्र जलयुक्त शिवार योजना पर ही प्रशासन की ओर से 125 करोड़ 34 लाख 61 हजार रुपये खर्च कर दिये गये। बावजूद अनेक स्थानों पर बोगस काम व फर्जीवाड़े को ऑडिटर ने पकड़ लिया। नेताओं का ठेकेदारों पर आशीर्वाद होने के कारण किसी भी फर्जीवाड़े में किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।

इस बार कौन-कौनसे तहसीलों में कितने गांव प्यासे ?

वर्तमान में जिलाधिकारी अजय गुल्हाने को पेश किये गये संभावित जल संकट कृति प्रारुप के अनुसार जिले में 602 गांव भीषण जलसंकट से जूझ रहे हैं। इन गांवों को सहायता देने के लिये जिप के सीईओ, जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के कार्यकारी अभियंता एवं वरिष्ठ भूवैज्ञानिक के हस्ताक्षर से जिलाधिकारी को रिपोर्ट पेश की गई। इस रिपोर्ट में जिले के 602 गांवों के लिये अस्थायी तौर पर 915 योजनाएं बनाई गई हैं। इन योजनाओं पर करीब 9 करोड़ 1 लाख 85 हजार रुपये खर्च करने का अनुमान हैं।

जिले के जलसंकट ग्रस्त तहसीलों के गांवों की सूची में चंद्रपुर तहसील के 81 गांव, बल्लारपुर तहसील के 19 गांव, गोंडपिपरी तहसील के 61 गांव, पोंभूर्णा तहसील के 16 गांव, वरोरा तहसील के 18 गांव, चिमूर तहसील के 49 गांव, मूल तहसील के 30 गांव, सावली तहसील के 18 गांव, सिंदेवाही तहसील के 37 गांव, नागभीड़ तहसील के 50 गांव, ब्रम्हपुरी तहसील के 26 गांव, राजुरा तहसील के 54 गांव, कोरपना तहसील के 61 गांव, जिवती तहसील के 70 गांवों में जलसंकट की भयावहता हैं। कुल मिलाकर जिले के 602 गांवों के ग्रामीणों को इस कड़ी धूप में पेयजल के लिये दर-दर भटकना पड़ रहा हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि बीते अनेक वर्षों से जिला प्रशासन की ओर से 208 करोड़ 66 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद ग्रामीण इलाकों के हालात नहीं बदले। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बेरुखी और प्रशासन की उदासीनता के कारण आज भी जिले के 602 गांवों में यदि जलसंकट है तो जिले की विकास की धारा कहां गायब हो रही है, इस पर गंभीरता से जिला वासियों को सोचना चाहिये। 

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1 Comments

  1. दयनीय स्थिति है... स्वर्ण महोत्सव वर्ष मुबारक हो 🙏

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