- गुजरात के 6,000 करोड़ के कोल घोटाले में चंद्रपुर का भाटिया, वणी का बाजोरिया व नागपुर का दलाल मिहिर एवं खान शामिल

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गुजरात के 6,000 करोड़ के कोल घोटाले में चंद्रपुर का भाटिया, वणी का बाजोरिया व नागपुर का दलाल मिहिर एवं खान शामिल


“चंद्रपुर एक्सपोजर” के हाथ लगे गुजरात व मध्यप्रदेश लघु उद्योग कोयला घोटाले के अहम दस्तावेज

नागपुर, उमरेड़, माजरी, चंद्रपुर, बल्लारपुर, वणी, वणी-नॉर्थ, कन्हान, पेंच, पाथरखेड़ा के DO की CBI जांच जरूरी

डीओ नंबर- WXD224635FS00369, WXD224635FS00370 और WXD224635FS00351 घोंसा का कोयला गुजरात कभी गया ही नहीं, बेच दिया खुले बाजार में

@लिमेशकुमार जंगम, चंद्रपुर
कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी ने गुजरात के 6,000 करोड़ के कोल घोटाले को लेकर बीते पखवाड़े मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया। इस बीच “चंद्रपुर एक्सपोजर” ने गुजरात और मध्यप्रदेश के लघु उद्योग निगम को दिये जाने वाले कोयले के इस घोटाले पर इन्वेस्टिगेशन किया तो चंद्रपुर, यवतमाल व नागपुर जिले के कोयला खानों में चलने वाली इस भारी गड़बड़ी के अनेक महत्वपूर्ण दस्तावेज हाथ लगे हैं।

इस हजारों करोड़ के घोटाले में भाटिया, बाजोरिया व नागपुर का दलाल मिहिर व खान शामिल होने की जानकारी है।

23 फरवरी 2022 को अर्थात 20 दिन पहले यह घोटाला उजागर हुआ था। इसके बावजूद नागपुर, उमरेड़, माजरी, चंद्रपुर, बल्लारपुर, वणी, वणी-नॉर्थ, कन्हान, पेंच, पाथरखेड़ा के कोयला खदानों में इस घोटाले से संबंधित कोल डीओ बिना रोक-टोक के चल रहे थे। पश्चात केंद्र सरकार के निर्देशों पर वर्तमान में चल रहे डीओ पर रोक लगाते हुए स्टे दे दिया गया। यदि इस घोटाले के चंद्रपुर एवं वणी खदानों से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज CBI व अन्य जांच एजेंसियों के हाथ लगेंगे तो तत्काल चंद्रपुर, यवतमाल व नागपुर जिले के खदानों से गया लूट के अवैध कोयले की जड़ तक आसानी से पहुंचा जा सकेगा। यह हजारों करोड़ों का काला खेल बीते 14 वर्षों से जारी होने की जानकारी है।


वणी-घोंसा DO का कोयला कभी गुजरात के उद्योगों तक गया ही नहीं

उल्लेखनीय है कि डीओ नंबर- WXD224635FS00369, WXD224635FS00370 और WXD224635FS00351 का कोयला गुजरात गया ही नहीं, इसे चंद्रपुर व आस-पड़ोस के जिलों में के खुले बाजार में ही बेच दिया गया। जबकि यह कोयला वणी के घोंसा खदान से निकलकर वॉश करने के नाम पर भाटिया नामक व्यक्ति के ठिकाने में लाया गया। पश्चात यहां से यह कोयला गुजरात भेजा जाना था, किंतु यह गुजरात के उद्योगों तक गया ही नहीं। इसी तरह कोयले का अवैध परिवहन और कालाबाजारी वणी-घोंसा के अलावा नागपुर-गोंडेगांव, इंदर कामठी, सिंगोरी, भानेगांव, अदासा, सावनेर-2 और सावनेर-3 में भी चल रहा था।


चंद्रपुर और वणी-घोंसा खदानों से गुजरात कोल घोटाले का सीधा कनेक्शन

वणी-घोंसा खदान का कोयला वणी के ही खुले मार्केट में बाजोरिया नामक व्यापारी के माध्यम से बेचे जाने की जानकारी है। इस खदानों से संबंधित DO का कोयला गुजरात के उद्योगों तक कभी पहुंचा ही नहीं। अब जब गुजरात में यह हजारों करोड़ का कोयला घोटाला उजागर हुआ है तो इसका सीधा कनेक्शन चंद्रपुर के खदानों और वणी-घोंसा के खदान तक तार जुड़े मिल रहे है। विशेष बात यह है कि डीओ नंबर- WXD224635FS003691100 मेट्रिक टन – द गुजरात कोल कोक ट्रेडर्स एंड कंज्यूमर – वणी-घोंसा खदान से कोयला उठाया गया। डीओ नंबर- WXD224635FS003701100 मेट्रिक टन – द गुजरात कोल कोक ट्रेडर्स एंड कंज्यूमर – घोंसा से कोयला उठाया गया। डीओ नंबर- WXD224635FS00351-800 मेट्रिक टन- खातिवाड़ा कोल एंड कोक कंज्यूमर एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन –घोंसा से कोयला उठाया गया।

उपरोक्त सभी डीओ का कोयला गुजरात के कंपनियों तक कभी पहुंच ही नहीं पाया। इस कोयले को खुले बाजार में बेच दिया गया।


किस-किस DO का कोयला बेचा जा रहा था ?

 वणी नॉर्थ क्षेत्र-घोंसा खदान – गुजरात-खातीवाड़ा-साउथ गुजरात- द गुजरात- डीओ नंबर- WXD224635FS00369, WXD224635FS00370 और WXD224635FS00351

 नागपुर-अदासा – गुजरात-खातीवाड़ा-साउथ गुजरात- द गुजरात- डीओ नंबर – WND223288FS00867(R), 1110002832

 नागपुर-भानेगांव- गुजरात-खातीवाड़ा-साउथ गुजरात- द गुजरात- डीओ नंबर- 1110002833, 1110003019, 1110003020, 1110002975, 1110002972, 1110002973, 1110002976, 1110003050, 1110002092

आदि स्थानों पर भी इसी तरह से कोल डीओ गुजरात व मध्यप्रदेश जाने के बजाय स्थानीय बाजार में ऊंचे दामों पर अवैध ढ़ंग से बेचा जा रहा है।


गुजरात उद्योग का कोयला कहां जा रहा ? कौन है मास्टर माइंड ?

गुजरात के लघु उद्योगों के लिये आवंटित हजारों टन कोयला सबसे पहले तो दलाल मिहिर व खान के माध्यम से नागपुर, यवतमाल-वणी नॉर्थ- घोंसा, चंद्रपुर जिले के इलाकों के कोल वाशरीज में वॉश होने के नाम पर जाता है। वाशरीज संचालकों की ओर से दावा यह किया जाता है कि वे इस कोयले को वॉश कर, सेल व पत्थर छांट कर अच्छा कोयला गुजरात की कंपनियों को भेजेंगे। लेकिन असल में ऐसा यहां कुछ भी नहीं होता। वेकोलि के कोयला खानों से वॉशरीज में आने वाला उत्तम कोयला सीधे तौर पर खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेचा जाता रहा है। इस काले बाजार की काली कमाई को अंजाम देने के लिए कोल सिंडेकेट एक संगठित गिरोह के रूप में काम करता है। यहां के कोल वॉशरीज में वॉश हुए बिना ही यह गुजरात जाने के बजाय सीधे खुले मार्केट में ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। यह सरकारी कोयला 2700 से 2800 रुपये प्रति टन से प्राप्त कर इसे 8000 से 9000 रुपये प्रति टन के भाव से बिना बिल के खुले मार्केट में अवैध रूप से बेचा जाता है। इस पूरे खेल में भाटिया, बाजोरिया, दलाल मिहिर और खान नामक लोगों का बहुत बड़ा रोल है।

कैसे हो रहा है कोयला घोटाला ?

गुजरात में करीब 6,000 करोड़ रुपए का कोयला घोटाला उजागर हुआ। बीते 14 साल में गुजरात सरकार की कई एजेंसियों ने राज्य की स्मॉल और मीडियम लेवल इंडस्ट्रीज को कोयला देने के बजाय इसे दूसरे राज्य के उद्योगों को ज्यादा कीमत पर बेचकर 5 हजार से 6 हजार करोड़ रुपए का घोटाला किया। कोल इंडिया की विभिन्न कोयला खदानों से निकाला गया कोयला उन उद्योगों तक पहुंचा ही नहीं, जिनके लिए उसे निकाला गया था। सरकारी विभाग के अधिकारियों, कोयला ट्रांसपोर्ट सिस्टम से जुड़े अधिकारियों की मिलीभगत से यह घोटाला हुआ है।

60 लाख टन कोयला भेजने की एंट्री

अब तक कोल इंडिया की खदानों से गुजरात के व्यापारियों, छोटे उद्योगों के नाम पर 60 लाख टन कोयला भेजा गया है। इसकी औसत कीमत 3,000 रुपए प्रति टन के हिसाब से 1,800 करोड़ रुपए होती है, लेकिन इसे व्यापारियों और उद्योगों को बेचने के बजाय 8 से 10 हजार रुपए प्रति टन की कीमत पर अन्य राज्यों में बेचकर कालाबाजारी की गई है। इसमें कुछ डमी या लापता एजेंसियों और गुजरात सरकार के कुछ अधिकारियों-पदाधिकारियों की मिलीभगत है। राज्य सरकार द्वारा नियुक्त एजेंसियों (SNA) को कोयला दिया जाता है। एजेंसियों को नियुक्त करना राज्य सरकार के उद्योग विभाग की जिम्मेदारी है।

घोटाले को ऐसे दे रहे अंजाम

आखिर इतने बड़े घोटाले को कैसे अंजाम कैसे दिया जा रहा है ? इसके केंद्र में है वह नीति, जो केंद्र सरकार ने साल 2007 में देशभर की स्मॉल इंडस्ट्रीज को सस्ती दरों पर अच्छी गुणवत्ता वाला कोयला मुहैया कराने के लिए बनाई थी। इसे 2008 में लागू कर दिया गया। इसी नीति के तहत गुजरात की स्मॉल इंडस्ट्रीज के लिए हर महीने कोल इंडिया के वेस्ट कोल फील्ड और साउथ-ईस्ट कोल फील्ड से कोयला निकालकर भेजा जाता है। इससे पहले कोल इंडिया को गुजरात सरकार के उद्योग विभाग की ओर से जरूरी कोयले की मात्रा सहित विवरण की एक सूची भेजी जाती है। इसी के साथ राज्य की मनोनीत एजेंसी (SNA) की सूची भी रहती है। SNA यानी राज्य सरकार द्वारा घोषित वह एजेंसी, जो कोल इंडिया से कोयला लेकर राज्य के लाभार्थियों, लघु उद्योगों, छोटे व्यापारियों तक पहुंचाने के लिए अधिकृत है। इस काम के बदले यह एजेंसी परिवहन और कोयले की लागत के 5% की दर से ही सेवा कर वसूल सकती है। इसके बाद एजेंसी इन कारोबारियों या छोटे उद्योगों को सालाना 4,200 टन या उससे कम का कोयला बाजार मूल्य से कम पर कीमत पर मुहैया कराती है।


और अंत में..

लिमेश कुमार का मास्टर स्ट्रोक !

गुजरात के 5 से 6 हजार करोड़ के कोयले घोटाले की अगर जांच अगर CBI के माध्यम से सही ढ़ंग से की जाएं तो यह घोटाला करीब 10,000 करोड़ के आंकड़े को भी पार कर सकता है।

इस घोटाले के तार चंद्रपुर और वणी के कोयले के खदानों और यहां के वॉशरीज से जुड़े हैं।

अगर गुजरात, मध्यप्रदेश में छापामार कार्रवाई शुरू हुई तो इसकी आंच चंद्रपुर और वणी तक पहुंचेगी और यहां के बड़े कोयला व्यापारी के गिरेबान भी पकड़ में आयेंगे।

क्रमश: (न्यूज के अगले पार्ट में गुजरात व मध्यप्रदेश के अन्य DO की जानकारी उजागर करेंगे, जिसका कोयला चंद्रपुर जिले के कोयला खदानों से कभी गुजरात के उद्योगों तक पहुंचा ही नहीं)

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