- पेयजल के लिये बिलख रहे पालकमंत्री, सांसद व विधायकों के गांव !

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पेयजल के लिये बिलख रहे पालकमंत्री, सांसद व विधायकों के गांव !

पालकमंत्री के ब्रम्हपुरी के 26 गांव व सांसद के वरोरा के 18 गांवों में भीषण जलसंकट

जलापूर्ति पर 208.66 करोड़ खर्च के बावजूद 602 गांवों में हाहाकार

@चंद्रपुर
जनता अपने क्षेत्र के विकास के लिये जनप्रतिनिधि चुनते हैं। आजादी के 75 सालों में नेताओं ने जनता की मूलभूत जरूरतों को भी पूरा न कर सकें। पेयजल जैसी अत्यावश्यक जरूरत की पूर्ति कराने में जिले के नेतागण लगातार नाकाम ही साबित हुए हैं। जिले के पालकमंत्री विजय वडेट्‌टीवार के गृह तहसील अर्थात ब्रम्हपुरी तहसील के 26 गांवों में इस बार भीषण जलसंकट हैं। वहीं सांसद बालू धानोरकर एवं विधायक प्रतिभा धानोरकर के गृह तहसील वरोरा के 18 गांवों के ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिये तरस रहे हैं। प्रदेश के वित्तमंत्री रह चुके भाजपा विधायक सुधीर मुनगंटीवार के गृह तहसील बल्लारपुर के 19 गांवों के नागरिक प्यासे हैं। आखिरकार करोड़ों की विकास योजनाएं साकार करने के दावें और खुद को विकास पुरुष के तौर पर प्रचारित करने की नेताओं की खोखली नीतियां जलसंकट के अहम मुद्दे पर धराशायी क्यों होती जा रही है ? इसका चिंतन अब जिले के नागरिकों को करना चाहिये।

जलसंकट से जूझ रहे तहसील व गांवों की संख्या

तहसील      गांव

चंद्रपुर         81
बल्लारपुर    19
गोंडपिपरी     61
पोंभूर्णा        16
वरोरा          18
चिमूर          49
मूल            30
सावली       18
सिंदेवाही     37
नागभीड़     50
ब्रम्हपुरी      26
राजुरा        54
कोरपना      61
जिवती       70
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कुल         602 गांव

इस बार 24 गांवों में करेंगे टैंकर से जलापूर्ति

उल्लेखनीय है कि बीते 2-3 सालों में जलसंकट पर करोड़ों की राशि खर्च कर हजारों योजनाओं को मंजूरी दी गई। इसके बावजूद वर्तमान में चंद्रपुर जिले के 602 गांवों में भीषण जलसंकट हैं। ऐसे में जहां विविध स्थायी योजनाओं की सफलता पर सवाल उठने लगे हैं, वहीं इस बार जिला प्रशासन की ओर से 602 गांवों का अस्थायी उपाय करने के लिये 915 योजनाओं को मंजूरी दी गई हैं। इन योजनाओं पर आगामी बारिश तक 9 करोड़ 1 लाख 85 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे। गौरतलब है कि जिले में इस बार नागभीड़ तहसील के मोहाड़ी मोकासा गांव के अलावा जिवती तहसील के पहाड़ियों पर बसे 24 गांवों में जिला प्रशासन की ओर से टैंकर लगाने का नियोजन किया गया है। आजादी 75 सालों में जिले के नेताओं की अनदेखी और अफसरों की बेरुखी के कारण जलसंकट की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा सका है। जबकि विभिन्न तरह की जलापूर्ति की योजनाओं पर बीते अनेक वर्षों में जिले में 208.66 करोड़ खर्च किये जा चुके हैं। इसके बावजूद 602 गांवों में जलसंकट की यह नौबत आन पड़ी हैं।

इस बार कहां खर्च करेंगे 9.01 करोड़ रुपये ?

जिला परिषद के ग्रामीण जलापूर्ति विभाग एवं जिला प्रशासन की ओर से मंजूर किये गये जिले के 602 गांवों के 915 अस्थायी योजनाओं के लिये कुल 9 करोड़ 1 लाख 85 हजार रुपये खर्च करने का प्रारुप तैयार किया गया है। इस संभावित प्रारुप को मंजूरी देने के बाद स्थानीय स्तर पर जलसंकट से निपटने के प्रयास किये जा रहे हैं। प्रशासन की ओर से अप्रचलित उपाय योजना में कुओं का गहराईकरण, मलबा निकालने व इनवेल बोअर के लिये 94 लाख 50 हजार रुपये खर्च किये जाएंगे। निजी कुओं को अधिग्रहित करने के लिये 16 लाख 65 हजार रुपयों का खर्च किया जायेगा। टैंकरों से जलापूर्ति करने के लिये 11 लाख 25 हजार रुपये खर्च करने का बजट बनाया गया है। नये कुओं को हैंडपंप समेत लेने के लिये 3 करोड़ 6 लाख रुपये खर्च किये जाएंगे। नई कुपनलिका लेने के लिये 56 लाख 25 हजार रुपये खर्च किये जाएंगे। तत्पूर्ति पूरक योजना के लिये 10 लाख रुपये खर्च किये जाएंगे। नल योजनाओं के विशेष मरम्मत के लिये प्रशासन इस बार 3 करोड़ 94 लाख 30 हजार रुपये खर्च करेगा। हैंडपंपों के विशेष सुधार के लिये 12 लाख 90 हजार रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है। कुल मिलाकर आगामी 30 जून तक 9.01 करोड़ रुपये से अस्थायी उपाय योजना करने का बजट बनाया गया है।

अब तक कहां-कहां कितने करोड़ खर्च किये ?

सरकारी आंकड़ों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि जिले में जलापूर्ति व जलसंचयन को लेकर बेतहाशा निधि खर्च की गई। करोड़ों की धन राशि को पानी की तरह बहाया गया। संभावित जल संकट कृति प्रारूप योजना के तहत वर्ष 2020-21 में प्रशासन ने जिले के 1040 गांवों के लिये बनाई गई अस्थायी 1333 योजनाओं पर कुल 14 करोड़ 96 लाख 55 हजार रुपये फूंक डाले। इसी तरह से वर्ष 2019-2020 के लिये प्रशासन ने अस्थायी उपायों के लिए जिले के 1206 गांवों के लिये बनाई गई 1488 योजनाओं पर 23 करोड़ 54 लाख 19 हजार रुपये खर्च कर दिये। स्थायी योजनाओं की बात की जाएं तो बीते अनेक वर्षों में इतने करोड़ की निधि खर्च कर दी गई कि उसका आंकड़ा देखकर ही हर नागरिक चौंक जाएं। जल जीवन मिशन नामक योजना पर प्रशासन ने 19 करोड़ 10 लाख 65 हजार रुपये खर्च कर दिये। वहीं मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम पर प्रशासन की ओर से 6 करोड़ 21 लाख 89 हजार रुपये खर्च किये गये। जबकि जिला खनिज प्रतिष्ठान की ओर से जिले में 691 जलापूर्ति योजनाओं के लिये 19 करोड़ 48 लाख 34 हजार रुपये की धन राशि खर्च कर दी गई। इसके अलावा जिले में जलसंचयन व तालाब गहराईकरन जैसे विषयों पर तो बेहिसाब धन खर्च किया गया। एकमात्र जलयुक्त शिवार योजना पर ही प्रशासन की ओर से 125 करोड़ 34 लाख 61 हजार रुपये खर्च कर दिये गये। बावजूद अनेक स्थानों पर बोगस काम व फर्जीवाड़े को ऑडिटर ने पकड़ लिया। नेताओं का ठेकेदारों पर आशीर्वाद होने के कारण किसी भी फर्जीवाड़े में किसी के भी खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकी।

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