
■ महावितरण की धोखाधड़ी से परेशान दुकान मालिक चक्कर काटने को मजबूर
■ लीगल एडवाइजर के पत्र को कोर्ट का आदेश बता रहे नासमझ अधिकारी
■ झूठे शपथपत्र पर ले लिया मीटर, अब जांच-पड़ताल के लिये मुकर रहा प्रशासन
दुकान किरायेदार ने ऐसा किया षड़यंत्र
चंद्रपुर शहर के तुकुम के गोपाल नगर निवासी स्व.
बचनसिंह चेतसिंह ओशन के मालकियत की दुकान गोपाल नगर में स्थित है। इस दुकान को
वर्ष 2004 में घुटकाला निवासी 50 वर्षीय प्रकाश लांडे को किराये पर दी गई। वे यहां श्री साईं इंजीनियरिंग एंड फेब्रिकेशन वर्क के नाम से
अपनी दुकान चला रहे हैं। गत 5 जनवरी 2015 को बचनसिंह ओशान का निधन होने के बाद उनकी
बहू 65 वर्षीय गुरुचरण कौर को किराया दिया जा रहा है। लेकिन मार्च 2020 के कोरोना काल
में दुकान किराएदार प्रकाश लांडे ने गुरुचरण कौर की दुकान का बिजली बिल अदा नहीं किया।
इसके चलते गुरुचरण कौर के पुत्र युवराज सिंह(40 वर्ष) ने किरायेदार प्रकाश लांडे को
बिल अदा करने की सूचना बार-बार दी। परंतु उन्होंने इस बात की अनदेखी की। उनके इस टालमटौल
रवैये को देखते हुए युवराज सिंह ने उन्हें गत 21 जनवरी तथा 22 जुलाई 2021 को पत्राचार
के माध्यम से बिजली बिल अदा करने की सूचना दी।
दुकान मालिक से ऐसे की धोखाधड़ी
दुकान किरायेदार प्रकाश लांडे द्वारा जानबूझकर बिल अदा नहीं किये जाने पर बिजली मीटर नंबर- 450010475827 का बकाया 22 हजार रुपये तक पहुंच गया। यह मीटर बचनसिंह ओशान के नाम पर रजिस्टर था। बकाया भुगतान न होने की स्थिति में महावितरण ने गत 24 जुलाई 2021 को बिजली आपूर्ति बंद कर दी। इसके बावजूद किरायेदार प्रकाश लांडे ने बकाया बिल नहीं भरा। किसी षड़यंत्र के तहत दुकान किरायेदार प्रकाश लांडे ने इस बकाये को अदा किये बिना, दुकान मालिक की लिखित अनुमति व अनापत्ति प्रमाणपत्र लिये बिना ही गत 4 अगस्त 2021 को नया बिजली कनेक्शन हासिल करने के लिए महावितरण को आवेदन कर दिया। हालांकि लांडे के इस आवेदन को गत 4 अगस्त 2021 को ही महावितरण ने खारिज कर दिया। इस दौरान आवेदन के दस्तावेज पर इसे खारिज करने का कारण स्पष्ट रूप से उल्लेखित करते हुए बताया गया है कि आपसी विवाद व लीज एग्रीमेंट नहीं करने का उल्लेख है।
महावितरण के लीगल एडवाइजर के पत्र का दुरुपयोग
सितंबर 2021 को महावितरण के कर्मचारियों ने बचनसिंह ओशान के दुकान पर पहुंचकर उनके नाम से पंजीकृत मीटर को निकाल कर ले गए। इस कार्रवाई के बाद 8 नवंबर 2021 को महावितरण नागपुर के लीगल एडवाइजर डॉ. संदीप केने ने चंद्रपुर महावितरण के ज्युनियर लॉ आफिसर को पत्र देते हुए कहा कि प्रकाश लांडे के दुकान की बिजली आपूर्ति पुनस्र्थापित की जाएं या नया कनेक्शन दिया जाए। जबकि इस पत्र में न तो पुराने मीटर क्रमांक का उल्लेख है और न ही दुकान के असली मालिक ओशान का जिक्र है। इसी अस्पष्ट पत्र का हवाला देते हुए महावितरण के अधिकारी और किरायेदार प्रकाश लांडे की मिलीभगत से आगे के दिनों में बड़ी गड़बड़ी को अंजाम दिया गया।
किरायेदार ने बकाया अदा कर अपने नाम से कराया मीटर
ओशान के मीटर कनेक्शन काटने की महावितरण की कार्रवाई
के बाद 21 दिसंबर 2021 को किरायेदार प्रकाश लांडे ने स्वयं 1,000 रुपये का बिजली बिल
अलाहबाद बैंक अकाउंट से एनईएफटी के माध्यम से महावितरण को अदा किया। इसके पश्चात
किरायेदार लांडे ने 27 दिसंबर 2021 को 21 हजार 430
का बिजली बिल आईडीबीआई बैंक से एनईएफटी के माध्यम से महावितरण को अदा किया। इसके
बाद इसी दुकान में किरायेदार ने नया बिजली मीटर अपने नाम से कराने की पूरी रणनीति
को अंजाम दिया और वे महावितरण के फर्जीवाड़े के कारण सफल भी हो गये।
महावितरण के “उस” नियम का उल्लंघन क्यों ?
उल्लेखनीय है कि जब किसी बिजली
ग्राहक का मीटर कट जाता है और वह ग्राहक 6 महीने के भीतर बकाया बिजली बिल अदा करता
है तो उसे उसका पुराना मीटर ही रिस्टोर कर दिया जाता है। लेकिन महावितरण के चंद
भ्रष्ट अफसरों ने इस नियम को ताक पर रखकर सीधे तौर पर इस नियम का उल्लंघन किया।
ओशान के केस में किरायेदार प्रकाश लांडे की ओर से दूकान का बकाया बिजली बिल बैंक
के माध्यम से एनईएफटी करने के बाद महावितरण के लापरवाह अधिकारियों ने लांडे से
मिलीभगत कर 4 महीने में ही मीटर लगा दिया। लेकिन यह
मीटर रिस्टोर करने के बजाय किरायेदार के नाम पर दूसरा मीटर मनमाने ढंग से दे दिया।
जबकि इस दूसरे मीटर को लगाते समय दूकान मालिक
ओशान के रेंट एग्रीमेंट, मीटर अनापत्ति प्रमाणपत्र आदि किसी प्रकार की अनुमति
किरायेदार और महावितरण के भ्रष्ट अफसरों ने प्राप्त नहीं की। यदि महावितरण के
अफसरों की इच्छा ही थी कि दूकान मालिक के बजाय किरायेदार को बिजली मीटर दिया जाएं
तो वे यह क्यों भूल गये कि इसके लिये दूकान मालिक का शपथपत्र एवं अनापत्ति
प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। इससे यह स्पष्ट होता है कि अफसरों व दूकान किरायेदार
में साठगांठ और आर्थिक लेन-देन के बल पर इस फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया।
फर्जी शपथपत्र पर अपराध दर्ज क्यों नहीं ?
किरायेदार प्रकाश लांडे ने दूकान मालिक ओशान के अनुमति के बिना ही महावितरण को जो शपथपत्र दायर किया है, उसमें वे साफ तौर पर झूठी जानकारी पेश करते हुए लिखते है कि श्री साईं इंजीनियरिंग एंड फेब्रिकेशन वर्क दूकान में 27 दिसंबर 2021 से पूर्व बिजली का कोई कनेक्शन नहीं था। जबकि इसी दूकान के मूल मालिक बचन सिंह ओशान के नाम से बिजली मीटर बरसों से उन्होंने उपयोग किया और मीटर कटने के बाद 22,430 रुपये लांडे ने बैंक अकाउंट से एनईएफटी भी किया। एक तरफ बिजली का बकाया राशि अदा करना और दूसरी तरफ नये बिजली कनेक्शन के लिये दिये गये शपथपत्र में वहां पूर्व में कोई बिजली कनेक्शन नहीं होने की झूठी जानकारी देना, फर्जीवाड़ा का जिता-जागता उदाहरण है। इसके बावजूद महावितरण की ओर से झूठा शपथपत्र दायर करने वाले लांडे के खिलाफ पुलिस में अपराध दर्ज नहीं कराना हैरत की बात है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि इस फर्जीवाड़े में महावितरण के अफसरों की मिलीभगत है।
क्या कहता है बिजली विभाग
हमें कोर्ट से आर्डर मिला है। इसके तहत हमने यह यह बिजली मीटर उन्हें प्रदान किया है। लीगल एडवाइजर के पत्र की गड़बड़ी पर वे कहते है कि अधिक जानकारी के लिये शास्त्री नगर के ज्युनियर इंजीनियर प्रतीक कुहिते से संपर्क करें।
हां, किरायेदार प्रकाश लांडे को महावितरण की ओर से जो नया बिजली मीटर दिया गया है, वह गलत है। लेकिन मुझे मेरे सीनियर ऑफिसर ने आदेश दिया था और हमने उसी आदेश का पालन किया है।
ज्युनियर इंजीनियर, शास्त्री नगर, महावितरण, चंद्रपुर





1 Comments
कौन कहता है कि डिजिटल मीडिया सच्ची खबरे नही देता..?जंगम सर ने दिखा दिया कि हम भी कुछ कम नही..सच्ची खबरों को देते है
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