■ काम कभी किया नहीं, फिर भी 8 कामगारों के नाम से निकल रहा वेतन
■ सत्ताधारी व विपक्ष
के पार्षदों की अनदेखी, प्रशासन की मिलीभगत
@चंद्रपुर
बीते 3 सालों से हर
पखवाड़े में चंद्रपुर मनपा का कोई न कोई घोटाला या गड़बड़ी उजागर होती रही हैं। भले ही
संबंधित दोषियों के खिलाफ जांच व कार्रवाई नहीं हो रही हो, राजनीतिक आशीर्वाद के चलते
अनेक प्रकरण ठंडे बस्ते में चले गये हो, लेकिन मनपा के घोटालों की गंदगी से चंद्रपुरवासी
अब काफी उकता गये हैं। अब एक और नया घोटाला ‘चंद्रपुर एक्सपोजर’ के हाथ लगा है। शहर
के विभिन्न 17 विभागों में मौजूद छोटे-बड़े गार्डन एवं रोड डिवाइडर की सफाई व गार्डनिंग
में लगे 40 ठेका कामगारों में से 8 कामगारों को शेष कामगारों ने कभी काम करते हुए देखा
भी नहीं, लेकिन उनके नामों पर नियमित वेतन निकाला जा रहा है। और तो और विशेष बात यह
है कि गार्डन मजदूरों के हाजिरी बुक में 8 और 21 नंबर पर किसी मजदूर का नाम तक नहीं
लिखा है और उसकी संपूर्ण हाजिरी लगा दी गई।
‘अंधेर नगरी, चौपट
राजा’ वाली नीति पर मनपा काम कर रही हैं। इस घोटाले पर ऐतराज जताने वाला यहां कोई पार्षद
नजर नहीं आता। भाजपा, कांग्रेस, राकांपा, शिवसेना, मनसे व अन्य दलों के पार्षद केवल
अपनी राजनीति चमकाने में व्यस्त नजर आ रहे हैं। मनपा के लाखों रुपयों की बर्बादी पर
सभी ने चुप्पी साध रखी है।
काम किये बिना ही कौन उठा रहा है वेतन ?
चंद्रपुर स्वच्छता सामाजिक मंडल नामक संस्था को चंद्रपुर मनपा ने शहर के सभी गार्डनों की सफाई, देखभाल व पौधारोपन आदि कामों की जिम्मेदारी दे रखी हैं। मनपा द्वारा जारी इस लाखों रुपयों के ठेके के तहत यहां कुल 40 कामगारों को ठेका प्रणाली रखे जाने के दस्तावेज केवल कागजों में दिखाई पड़ते हैं। असल में केवल 32 मजदूर ही शहर के विभिन्न गार्डन में दिन भर अपना खून-पसीना बहा रहे हैं। इन मजदूरों को भी पता है कि 8 गायब कामगारों के नाम पर नियमित रूप से वेतन निकाला जा रहा है। इन 8 कामगारों को कभी भी किसी कामगार ने शहर के किसी भी गार्डन में काम करते हुए नहीं देखा हैं। लेकिन ऐतराज जताने या शिकायत करने पर खुद को ही नौकरी से हाथ धोना पड़ेगा, इस डर के कारण कोई भी मेहनतकश कामगार इन 8 गायब कामगारों को दिये जाने वाले फोकट के वेतन को लेकर कोई शिकायत नहीं कर पा रहे हैं। असल मुद्दा तो यह है कि इन 8 कामगारों के नाम से निकाला जा रहा वेतन किस-किस के जेब में जा रहा है, यह गंभीर चिंता का विषय है।
कौन हैं वह वेतन पाने वाले गायब कामगार, वे करते क्या हैं ?
जिन 8 ठेका कामगार बिना काम किये नियमित वेतन पा रहे हैं, वह वेतन उनके जेब में पहुंच रहा है या नहीं, यह भी एक सबसे बड़ा सवाल है। यह भी हो सकता है कि इन 8 कामगारों को पता ही नहीं कि उनके नामों का मनपा के हाजिरी रजीस्टर में दुरुपयोग किया जा रहा है। इस घोटाले में जिन 8 कामगारों को कभी भी शहर के किसी गार्डन में काम करते हुए नहीं देखा गया, उनमें दीपक बाणकर, लखन जाधव, दत्ता वडपल्लीवार, बंडू यादनूरवार, रितेश कीर्तिवार, विनोद सिडाम, प्रभुदास इदे व अन्य एक शामिल है। यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की गई तो कामगारों के नाम से वेतन लूटने वाले एक गिरोह का ही पर्दाफाश हो सकता है।
विश्वसनीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रभुदास इदे नामक व्यक्ति बैग बिक्री का काम करता है। विनोद सिडाम नामक व्यक्ति टाइल्स लगाने के मजदूरी कार्य के लिये किसी मिस्त्री के पास काम करता हैं। रितेश कीर्तिवार नामक व्यक्ति स्थानीय गांधी चौक के एक दुकान में बैग बेचने का काम करता है। वहीं दत्ता वडपल्लीवर नामक व्यक्ति इस ठेके से संबंधित ठेकेदार के भाई के पास फोर-विलर वाहनों को धोने का काम करता है।
क्या कहते हैं मनपा अधिकारी, पत्रकारों को क्यों बुलाते हैं कार्यालय में ?
चंद्रपुर स्वच्छता सामाजिक मंडल का गार्डन कामगारों संबंधित ठेका कालावधि समाप्त हो चुकी हैं। परंतु आगामी नया ठेका आने तक इस ठेके को ही चलाया जा रहा है। यह ठेका कितनी निधि में आवंटित हुआ है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। कार्यालय में आये बिना मीडिया को हम जानकारी नहीं देते। किन-किन कामगारों को कितना वेतन दिया जाता है, इसकी जानकारी मुझे नहीं है। उद्यान विभाग के तहत काम चल रहा है, लेकिन ठेका व वेतन आदि कार्य की जिम्मेदारी मनपा के स्वच्छता विभाग की है।-अनुप ताटेवार,
उद्यान निरीक्षक, महानगर पालिका, चंद्रपुर
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