- महाजेनको के टेंडर की शर्तों का वॉशरीज में धड़ल्ले से उल्लंघन

Ticker

6/recent/ticker-posts

महाजेनको के टेंडर की शर्तों का वॉशरीज में धड़ल्ले से उल्लंघन

ऊर्जा संयंत्रों को घटिया कोयला और उत्तम कोयला खुले बाजार में

कोयले को वॉश करने के बजाय डोलाचार की मिलावट

सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ मायनिंग फ्यूल रिसर्च की जांच कटघरे में

@लिमेशकुमार जंगम, चंद्रपुर
महाराष्ट्र के ऊर्जा संयंत्रों के लिये उत्तम कोयला प्रदान कर बिजली उत्पादन बढ़ाने की सरकार की मंशा को कलंक लगता हुआ दिखाई पड़ रहा है। जिन कोल वॉशरीज को कोयला आपूर्ति का ठेका मिला हैं, वे कोयले को वॉश नहीं कर रहे हैं। करोड़ों व अवैध मुनाफा कमाने के इरादे से उत्तम कोयले के बजाय घटिया कोयला ऊर्जा संयंत्रों को आपूर्ति की जा रही है। उत्तम व बड़े कोयले को इन वॉशरीज में से खुले बाजार में 9000 रुपये प्रति टन के भाव से दिन-दहाड़े बेचने का काम शुरू है।
वहीं उद्योगों से निकलने वाला वेस्टेज, डोलाचार, डस्ट, मिट्‌टी व पत्थर मिलाकर घटिया कोयला ऊर्जा यूनिट तक पहुंचाया जा रहा है। जबकि महाजेनको उत्तम कोयला पाने के लिये वेकोलि को हर माह करोड़ों की राशि अदा कर डीओ प्राप्त करती हैं। लेकिन कोल वॉश के नाम पर मिलावट व अवैध धंधा करने वाले सरकारी कोयले की ही बंदरबाट करने में जुटे हैं। इस अपराध की जड़े बेहद गहरी हैं। नेता, अफसर, व्यापारी, माफिया मिलकर इस संगठित अपराध को अंजाम दे रहे हैं।

15 लाख टन सालाना कोल वॉश धुलाई व ढुलाई का अनुभव नहीं

महाराष्ट्र स्टेट माइनिंग कार्पोरेशन ने टेंडर जारी किया था। बेनिफिकेशन(वॉश कोल) ऑफ रन ऑफ माइन कोल एंड सप्लाय ऑफ बेनिफिकेटेड कोल टू चंद्रपुर, कोराड़ी, खापरखेड़ा, नासिक, भुसावल, परली व पारस टीपीएसएस ऑफ महाजेनको नाम से यह टेंडर 2020 में जारी किया गया था। इसमें अनेकों शर्तो में से एक शर्त यह भी थी कि अब जो भी इस ठेके को प्राप्त करेगा उसके पास न्यूनतम 15 लाख टन हर साल वॉश कोल की धुलाई व ढुलाई करने का अनुभव होना चाहिये। साथ ही वर्ष 2017 से 2020 तक के 3 वर्ष के वित्तीय व्यवहार में राज्य व केंद्र सरकार के प्राधिकरणों में उसे काम का अनुभव होना चाहिये। 

वॉशरी की क्षमता में गड़बड़ी

महाजेनको के तय मापदंड़ों के अनुसार जिसको ठेका पाना है, वे या तो खुद की वॉशरी संचालित कर रहा हो या उसका ज्वाइंट वेंचर अर्थात कार्य सहभागिता हो। इसका प्रमाण उन्हें देना बंधनकारक था। साथ ही आधुनिक तरीके से काेल को वॉश करने की तकनीक पर कार्य कर चुके होने का प्रमाण भी पेश करना था। रुकमयी कोल वाशरी एलएलपी को यह ठेका हाल ही में मिला। इसके बाद रुकमयी ने इस ठेके को चलाने के लिये वणी तहसील के कलमना स्थित महामिनरल मायनिंग एंड बेनिफिकेशन प्राइवेट लिमीटेड के कोल वाशरीज को किराया से ले लिया। लेकिन इस वॉशरी की क्षमता एमपीसीबी के दस्तावेजों में महज 12 प्रतिशत भी नहीं हैं। क्योंकि महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के 6 जून 2021 के पत्र के अनुसार महामिनरल मायनिंग एंड बेनिफिकेशन प्राइवेट लिमीटेड की कोयला वॉश करने की सालाना क्षमता 1 लाख 80 हजार टन मात्र दर्शायी गई है। और शर्त के अनुसार इन्हें 15 लाख मीट्रिक टन वॉश करने व परिवहन करने का अनुभव अनिवार्य रूप से मांगा गया था।
महाजेनको का कोयला रेलवे रैक से भटककर खुले बाजार में
एमएसएमसी के टेंडर में दर्ज एक अहम शर्त के अनुसार मुद्दा क्रमांक 2.1 में साफ तौर पर लिखा गया है कि 30 लाख मीट्रिक टन सालाना कोयला विभिन्न खदानों से उठाना होगा। महाजेनको की ओर से तय किये गये समयसारणी के अनुसार खदानों से प्राप्त करोड़ों के कीमत वाले इस लाखों टन कोयले को तय मापदंड़ों के अनुसार वॉश कर उसे रेलवे रैक के द्वारा महाजेनको के ऊर्जा संयंत्रों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इस ठेके को पाने वाले ठेकेदार की रहेगी। लेकिन वॉशरीज में आने वाला कोयला वॉश किये बिना ही छांटकर घटिया कोयले की आपूर्ति करने का खेल यहां जारी है।

कैसे डूब रही करोड़ों की धन राशि ?

महाजेनको की ओर से हर माह वेकोलि को कोयले के डीओ की राशि अदा की जा रही है। यह राशि हमारी सोच और कल्पना से भी परे हैं। करोड़ों की राशि अदा करने के बावजूद महाजेनको को घटिया कोयला ही प्राप्त हो रहा है। इस पूरे कर्मकांड में कहीं न कहीं प्रशासन के अधिकारियों की अनदेखी व मिलीभगत भी जिम्मेदार होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। महाजेनको द्वारा वेकोलि को राशि अदा करने के बाद डीओ हासिल कर उसे संबंधित ठेकेदार को दिया जाता है। इन डीओ के अनुसार ठेकेदार कोयले की खदानों से कोयला परिवहन कर उसे कोल वाशरी तक ले आते हैं। यहां इसकी ठीक से धुलाई करने के बाद ही इसे महाजेनकों के ऊर्जा संयंत्रों तक पहुंचाना जरूरी होता है। लेकिन यहीं पर सारी गड़बड़ी शुरू हो गई है। महाजेनकों की ओर से तय व उत्तम कोयले की गुणवत्ता को बरकरार रखते हुए कोल वॉश की ही आपूर्ति करने का नियम है। इसकी जिम्मेदारी ठेका पाने वाले ठेकेदार को दी गई है।

वॉशरीज ठेकेदार के समक्ष ही सैम्पल जांच का प्रावधान

सरकारी ठेके में दर्ज एक अत्यंत अहम नियम के अनुसार महाजेनको को प्राप्त होने वाले कोयले की गुणवत्ता को जांचने के लिये वेकोलि की ओर से सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ मायनिंग फ्यूल रिसर्च नामक जांच एजेंसी के माध्यम से कोल वॉशरीज के ठेकेदार के समक्ष ही सैम्पल लेकर जांच करवाने का प्रावधान है। परंतु इन प्रावधानों पर अब तक न तो महाजेनको ने गौर किया है और न ही वेकोलि की ओर से इस पर कोई ठोस कदम उठाया जा रहा है। विश्वसनीय सूत्र बताते है कि इस कोयले की कालाबाजारी में कहीं न कहीं अफसरों के हाथ काले हो चुके हैं।

थर्ड पार्टी जांच एजेंसी की जांच अधर में

वॉश कोल के ठेकेदार को वॉशरी के ठेके का सारा हिसाब अपडेट रखना होगा। इसमें कोयला आपूर्ति के आंकड़े और सभी क्रियाकल्पों की जानकारी डीजिटल फाॅरमेट में पेश करना बंधनकारक होगा। महाजेनको को प्राप्त होने वाले कोयले की गुणवत्ता को जांचने के लिये उन्हें स्वयं भी थर्ड पार्टी जांच एजेंसी को जांच का जिम्मा सौंपने का प्रावधान है। इस जांच एजेंसी का खर्च महाजेनको व ठेकेदार को उठाना होगा। इस प्रावधान के अनुसार अब तक कोई ठोस जांच नहीं किये जाने की चर्चा है।

2.5 एमएम से कम वाले कोयले की आपूर्ति

वॉशरी ठेकेदार की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वे महाजेनको को आपूर्ति कर रहे वॉश कोयले की गुणवत्ता 2.5 एमएम से कम न रखें। इससे कम गुणवत्ता वाला वॉश कोयला 25 प्रतिशत से ज्यादा आपूर्ति नहीं किया जाना चाहिये। यदि 25 प्रतिशत से ज्यादा 2.5 एमएम वाला कोयला आपूर्ति किया जाता है तो 15 रुपये प्रति टन, प्रति प्रतिशत के अनुसार उनसे हिसाब में से कटौती करने का प्रावधान हैं। परंतु इन सारे मापदंडों को तय करने की जांच प्रक्रिया पर महाजेनको, वेकोलि, जांच एजेंसियां अमल नहीं कर पा रही है। इसके चलते महाराष्ट्र के ऊर्जा संयंत्रों में वॉश कोल के बजाय घटिया दर्जे के कोयले की आपूर्ति की जा रही है।

अखिर यह चोरी का कोयला जाता कहा हैं ?

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार चंद्रपुर के प्रतिष्ठित कोयले के व्यापारी यह कोयला अपने अवैध कोल डिपो में ले जा रहे हैं। पश्चात इसी कोयले को मशीन द्वारा छांट के ऊँचे दामों में नकद स्वरूप में बेचा जा रहा हैं। जबकि अन्य व्यापारी चंद्रपुर के नये सीमेंट फैक्ट्री जैसे कि डालमिया, साथ ही बल्लारपुर पेपर मिल, बुटी-बोरी स्थिति इंडो यूनिक जैसे नामचीन कंपनियों में भेज रहे हैं।

Post a Comment

0 Comments