■ "चंद्रपुर एक्सपोजर" के झटके से मनपा सदमे में
■ टैक्स अदा कर कार्रवाई रद्द करने पर नहीं लिया फैसला
@चंद्रपुर
बीते 31 दिसंबर 2021 को "चंद्रपुर एक्सपोजर" ने "मनपा बनी पानी चोर" शिर्षक तले गत 60 वर्षों से जारी पानी चोरी और टैक्स चोरी का प्रकरण उजागर किया था। इसके बाद सिंचाई विभाग हरकत में आ गया। और महज 11 दिनों में ही मनपा प्रशासन को नोटिस थमाकर दाताला मार्ग पर स्थित वॉटर प्लांट को सील करने की चेतावनी दी थी। साथ ही बकाया संपूर्ण टैक्स अदा कर सिंचाई विभाग के साथ करारनामा करने की हिदायत दी गई थी। परंतु मनपा प्रशासन ने सिंचाई विभाग के नोटिस को हल्के में ले लिया। पश्चात सिंचाई विभाग ने पुन: 25 जनवरी 2022 को नोटिस भेजकर अंतिम चेतावनी मनपा को दी। इस चेतावनी का भी जब कोई असर नहीं हुआ तो सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की टीम ने 28 जनवरी को वॉटर प्लांट को सील ठोंक दिया। इस पूरे मामले को "चंद्रपुर एक्सपोजर" ने सारे सबूत के साथ उजागर कर प्रशासन को कार्रवाई करने के लिये बाध्य किया।
मनपा के जलापूर्ति विभाग प्रमुख की चुप्पी
इस संपूर्ण प्रकरण के संदर्भ में जब शनिवार, 29 जनवरी को मनपा के जलापूर्ति विभाग प्रमुख व अभियंता विजय बोरीकर से प्रशासन की भूमिका व प्रतिक्रिया जानने के लिये कॉल किया गया तो उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया। उनकी चुप्पी को लेकर प्रशासन की नीतियों पर अनेक सवाल उठने लगे हैं।
अभियंता बोरीकर करेंगे सोमवार को फैसला ?
क्या है पूरा मामला ?
61 वर्षों से जारी थी चोरी
सिंचाई विभाग के अनुसार दाताला पुल समीप के मनपा के वाटर प्लांट पर प्रति दिन 10 दस लाख लीटर (वार्षीक 3.65 द.ल.घ.मी.) पानी अनधिकृत तौर पर लिया जाता रहा है। जलसंपदा विभाग के साथ इसके लिये कोई करारनामा नहीं किया गया। कोई परमिशन नहीं ली गई। इस संदर्भ में चंद्रपुर मनपा को सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता की ओर से निरंतर सूचना पत्र भेजे गये। परंतु मनपा ने कोई प्रतिसाद नहीं दिया। प्लांट को सील करने की चेतावनी भी दी गई थी। इसका भी मनपा पर कोई असर नहीं हुआ। आखिरकार, शुक्रवार, 28 जनवरी को सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता व उनकी टीम ने प्लांट को सील ठोंक दिया। इसके पूर्व आखरी बार चंद्रपुर मनपा को सिंचाई विभाग की ओर से 11 जनवरी 2022 को पत्र भेजकर सूचना दी गई थी। साथ ही 276.81 लाख रुपये अदा करने की चेतावनी दी थी। दोबारा 25 जनवरी को सूचना देने के बाद 28 जनवरी को प्लांट सील कर दिया गया। यह जानकारी सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता श्यामसुंदर काले ने दी।
इरई से चुराया पानी, जनता से वसूला पूरा टैक्स !
मनपा प्रशासन की ओर से हर वर्ष चंद्रपुर वासियों से पानी कर के नाम पर 2 करोड़ 56 लाख से अधिक का कर वसूला जाता है। जबकि कुल पानी खपत में से 80 प्रतिशत पानी इरई बांध का होता है। शेष 20 प्रतिशत पानी इरई नदी से लिया जाता है। मनपा की ओर से इरई बांध का पानी टैक्स सिंचाई विभाग को अदा किया जाता है। किंतु इरई नदी का टैक्स नहीं दिया जाता। मतलब साफ है कि 20 प्रतिशत जल चुराकर उस पर मनपा टैक्स वसूल कर रही है। एक अनुमान के अनुसार मनपा प्रशासन चोरी के जल पर जनता से हर साल करीब 51.23 लाख रुपये का टैक्स वसूल कर रही है। अनेक बार तो जो नागरिक टैक्स नहीं देता, उसका नल कनेक्शन काट दिया जाता है। परंतु यही मनपा इरई नदी का टैक्स अदा नहीं करतीं।
3 विशाल कुंओं से पानी की लिफ्टिंग
मनपा की करतूत अनधिकृत घोषित
चंद्रपुर पाटबंधारे विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय की ओर से गत कई वर्षों से मनपा को अनेक पत्र भेजे गये। इरई नदी वॉटर प्लांट का टैक्स अदा करने, करारनामा करने व मीटर लगाने की सूचना दी गई। लेकिन मनपा के जलापूर्ति विभाग ने कभी सिंचाई विभाग के पत्र की दखल नहीं ली। इधर, सिंचाई विभाग ने मनपा की इस करतूत को अनधिकृत करार देते हुए कार्रवाई की चेतावनी भी दी। लेकिन कोई असर नहीं हुआ।
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