■ "चंद्रपुर एक्सपोजर" ने 31 दिसंबर को उजागर किया था प्रकरण

■ मनपा के वॉटर टैक्स घोटाले पर अंतत: लगी मुहर

■ वर्ष 1960 से जारी थी पानी की कर चोरी

■ सिंचाई विभाग को मनपा नहीं दे रही थी वॉटर टैक्स

@चंद्रपुर
चंद्रपुर : शहर की जनता से हर साल 2 करोड़ 56 लाख 18 हजार 420 रुपये पेयजल टैक्स वसूलने वाली चंद्रपुर महानगर पालिका, वर्ष 1960 अर्थात नप के दौर से इरई नदी के दाताला मार्ग पर स्थित वॉटर प्लांट से अनधिकृत पानी ले रही थी। यह पानी चोरी बदस्तूर आज तक जारी थी। चंद्रपुर को 20 प्रतिशत पानी इसी वॉटर प्लांट से मिलता है। लेकिन वर्ष 2005 से सिंचाई विभाग को मनपा ने करोड़ों का टैक्स अदा नहीं किया। आखिरकार शुक्रवार, 28 जनवरी को सिंचाई विभाग ने दाताला मार्ग पर स्थित इस वाटर प्लांट को सील ठोंककर कार्रवाई कर दी। इससे "चंद्रपुर एक्सपोजर" द्वारा उजागर घोटाले पर मुहर लग गई है।

61 साल बाद चोरी पर लगी कार्रवाई की मुहर

सिंचाई विभाग के अनुसार दाताला पुल समीप के मनपा के वाटर प्लांट पर प्रति दिन 10 दस लाख लीटर (वार्षीक 3.65 द.ल.घ.मी.) पानी अनधिकृत तौर पर लिया जाता रहा है। जलसंपदा विभाग के साथ इसके लिये कोई करारनामा नहीं किया गया। कोई परमिशन नहीं ली गई। इस संदर्भ में चंद्रपुर मनपा को सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता की ओर से निरंतर सूचना पत्र भेजे गये। परंतु मनपा ने कोई प्रतिसाद नहीं दिया। प्लांट को सील करने की चेतावनी भी दी गई थी। इसका भी मनपा पर कोई असर नहीं हुआ। आखिरकार, शुक्रवार, 28 जनवरी को सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता व उनकी टीम ने प्लांट को सील ठोंक दिया। इसके पूर्व आखरी बार चंद्रपुर मनपा को सिंचाई विभाग की ओर से 11 जनवरी 2022 को पत्र भेजकर सूचना दी गई थी। साथ ही 276.81 लाख रुपये अदा करने की चेतावनी दी थी। दोबारा 25 जनवरी को सूचना देने के बाद 28 जनवरी को प्लांट सील कर दिया गया। यह जानकारी सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता श्यामसुंदर काले ने दी है।


इरई से चुरा रहे थे पानी, लेकिन जनता से वसूल रहे थे पूरा टैक्स !

मनपा प्रशासन की ओर से हर वर्ष चंद्रपुर वासियों से पानी कर के नाम पर 2 करोड़ 56 लाख से अधिक का कर वसूला जाता है। जबकि कुल पानी खपत में से 80 प्रतिशत पानी इरई बांध का होता है। शेष 20 प्रतिशत पानी इरई नदी से लिया जाता है। मनपा की ओर से इरई बांध का पानी टैक्स सिंचाई विभाग को अदा किया जाता है। किंतु इरई नदी का टैक्स नहीं दिया जाता। मतलब साफ है कि 20 प्रतिशत जल चुराकर उस पर मनपा टैक्स वसूल कर रही है। एक अनुमान के अनुसार मनपा प्रशासन चोरी के जल पर जनता से हर साल करीब 51.23 लाख रुपये का टैक्स वसूल कर रही है। अनेक बार तो जो नागरिक टैक्स नहीं देता, उसका नल कनेक्शन काट दिया जाता है। परंतु यही मनपा इरई नदी का टैक्स अदा नहीं करतीं।

61 साल से जारी थी गड़बड़ी

बीते 61 सालों से दाताला मार्ग के इरई नदी तट पर व जगन्नाथ बाबा मठ से सटा वॉटर प्लांट अविरत शुरू है। यहां आज भी 100 अश्वशक्ति वाले 3 मोटरपंप लगे हैं। नदी में मौजूद 3 विशाल कुओं से पानी लिफ्ट किया जा रहा है। 2 पाइप लाइन के माध्यम से हर साल 3.65 दलघमी अर्थात हर माह 304167 घन मीटर पानी लिफ्ट किया जा रहा है। 2 पाइप लाइन के माध्यम से यह पानी चंद्रपुर शहरवासियों के नलों तक पहुंचाया जाता रहा है।


क्यों दी थी सिंचाई विभाग ने चेतावनी ?

चंद्रपुर पाटबंधारे विभाग के कार्यकारी अभियंता कार्यालय की ओर से गत कई वर्षों से मनपा को अनेक पत्र भेजे गये। इरई नदी वॉटर प्लांट का टैक्स अदा करने, करारनामा करने व मीटर लगाने की सूचना दी गई। लेकिन मनपा के जलापूर्ति विभाग ने कभी सिंचाई विभाग के पत्र की दखल नहीं ली। इधर, सिंचाई विभाग ने मनपा की इस करतूत को अनधिकृत करार देते हुए कार्रवाई की चेतावनी भी दी। लेकिन कोई असर नहीं हुआ।

18 लाख 41 हजार की लागत

7 जनवरी 1960 को 18 लाख 41 हजार की लागत से इरई नदी तट पर वॉटर प्लांट का निर्माण कराया गया था। वर्तमान में चंद्रपुर की जरूरत के लिहाज से 20 प्रतिशत पानी यहीं से लेते हैं।

सिंचन विभाग के पत्र पर मनपा रही खामोश

मनपा प्रशासन एवं मनपा आयुक्त को सिंचाई विभाग द्वारा सैंकड़ों पत्र देकर इरई नदी वॉटर प्लांट का टैक्स भरने की सूचना दी। लेकिन मनपा आयुक्त ने किसी भी पत्र का जवाब नहीं दिया। वे खामोश रहे। करोड़ों के टैक्स से बचने की नीति मनपा को कटघरे में खड़े कर दी। इससे मनपा की साख पर संकट आ चुका है।