- दाताला का सील-बंद वॉटर प्लांट शुरू : मनपा पर सिंचन विभाग मेहरबान

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दाताला का सील-बंद वॉटर प्लांट शुरू : मनपा पर सिंचन विभाग मेहरबान


■ अब 7 दिनों में करारनामा करने मनपा आयुक्त ने दिया लिखित आश्वासन

■ "चंद्रपुर एक्सपोजर" द्वारा मामला उजागर करने पर हुई थी कार्रवाई

■ सिंचाई विभाग की दया से टैक्स के नुकसान की आशंका

@चंद्रपुर
बीते 31 दिसंबर 2021 को "चंद्रपुर एक्सपोजर" ने "मनपा बनी पानी चोर" शिर्षक तले गत 60 वर्षों से जारी पानी चोरी और टैक्स चोरी का प्रकरण उजागर किया था। पश्चात सिंचाई विभाग ने 11 जनवरी 2022 को मनपा प्रशासन को नोटिस थमाकर दाताला मार्ग पर स्थित वॉटर प्लांट को सील करने की चेतावनी दी थी। जब मनपा प्रशासन ने सिंचाई विभाग के नोटिस की अनदेखी की तो सिंचाई विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों की टीम ने 28 जनवरी को वॉटर प्लांट को सील ठोंक दिया। 3 दिनों तक प्लांट बंद रहने के बाद आज सोमवार, 31 जनवरी 2022 को जब मनपा आयुक्त ने सिंचाई विभाग को 7 दिनों में करारनामा संबंधित कार्यवाही को पूर्ण करने का लिखित आश्वासन दिया, तब दोपहर के दौरान वॉटर प्लांट का सील हटा दिया गया। अब जलापूर्ति पुन: शुरू कर दी गई है। उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले को "चंद्रपुर एक्सपोजर" ने ही सारे सबूतों के साथ उजागर कर प्रशासन को कार्रवाई करने के लिये बाध्य किया था।

31 जनवरी के पत्र से टूटी मनपा की चुप्पी

इस प्रकरण के संदर्भ में जब शनिवार, 29 जनवरी को मनपा के जलापूर्ति विभाग प्रमुख व अभियंता विजय बोरीकर से प्रशासन की भूमिका व प्रतिक्रिया जानने के लिये कॉल किया गया था तो उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया था। सोमवार, 31 जनवरी को इस मामले में कोई फैसला लेने की बात उन्होंने कही थी। आज, सोमवार को मनपा आयुक्त के हस्ताक्षर वाला पत्र सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता श्यामसुंदर काले को प्राप्त हुआ। इस पत्र प्राप्ति के बाद सिंचाई विभाग ने वॉटर प्लांट का सील हटा दिया।

अब क्या कहते है मनपा आयुक्त ?

दाताला वॉटर प्लांट पानी चोरी व टैक्स चोरी मामले में सिंचाई विभाग की ओर से बरसों से पत्र देकर करारनामा करने व टैक्स अदा करने का अनुरोध किया जा रहा था। लेकिन मनपा प्रशासन ने सिंचाई विभाग के सूचना पत्रों को कभी गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन 28 जनवरी को वॉटर प्लांट सील करने की कार्रवाई से मनपा की साख पर बट्टा लगने के बाद प्रशासन बैकफूट पर आ गया। अपनी बची इज्जत को दांव पर लगा देख, मनपा प्रशासन ने आज सोमवार, 31 जनवरी को सिंचाई विभाग के नाम से एक पत्र जारी किया। इस पत्र में मनपा आयुक्त ने कहा है कि इरई नदी के दाताला वॉटर प्लांट से लिये जा रहे पानी के संदर्भ में करारनामा व अन्य आवश्यक कार्यवाही 7 दिनों में की जाएगी। अत: दाताला वॉटर प्लांट को तत्काल शुरू करने का अनुरोध किया गया।

टैक्स व जुर्माना अदायगी पर कुछ नहीं कह पाये मनपा आयुक्त

मनपा आयुक्त ने आज सोमवार, 31 जनवरी को सिंचाई विभाग के नाम से जो पत्र जारी किया, उसमें केवल करारनामा व अन्य आवश्यक कार्यवाही 7 दिनों में करने का लिखित आश्वासन दिया गया है। परंतु बरसों से इरई नदी से लिये गये पानी का टैक्स और जुर्माना अदा करने की सूचना का मनपा आयुक्त ने इस पत्र में कोई जवाब नहीं दिया। साथ ही बकाया करोड़ों की राशि कब तक अदा की जाएगी, इस पर मनपा की ओर से कोई खुलासा नहीं किया गया।

सिंचाई विभाग की दरियादिली से टैक्स का नुकसान

सोमवार, 31 जनवरी को सिंचाई विभाग को मनपा आयुक्त की ओर से भेजे गये अनुरोध पत्र में केवल करारनामा व अन्य आवश्यक कार्यवाही 7 दिनों में करने का लिखित आश्वासन दिया गया है। लेकिन टैक्स और जुर्माना अदा करने पर मनपा आयुक्त ने इस पत्र में कुछ नहीं लिखा। बकाया करोड़ों की राशि कब अदा की जाएगी, इस पर मनपा खामोश है। इसके बावजूद सिंचाई विभाग ने दाताला वॉटर प्लांट के सील को हटा दिया। सिंचाई विभाग की मनपा प्रशासन पर की गई मेहरबानी कहीं आगामी दिनों में टैक्स व जुर्माना राशि अदायगी में रुकावट का कारण न बन जाएं, यह संदेह व्यक्त किया जा रहा है।

घोटाले पर लगी प्रशासनीक मुहर

चंद्रपुर शहर की जनता से हर साल 2 करोड़ 56 लाख 18 हजार 420 रुपये पेयजल टैक्स वसूलने वाली चंद्रपुर महानगर पालिका, वर्ष 1960 अर्थात नप के दौर से इरई नदी के दाताला मार्ग पर स्थित वॉटर प्लांट से अनधिकृत पानी ले रही थी। यह पानी चोरी बदस्तूर आज तक जारी था। चंद्रपुर को 20 प्रतिशत पानी इसी वॉटर प्लांट से मिलता है। लेकिन वर्ष 2005 से सिंचाई विभाग को मनपा ने करोड़ों का टैक्स अदा नहीं किया। आखिरकार शुक्रवार, 28 जनवरी को सिंचाई विभाग ने दाताला मार्ग पर स्थित इस वाटर प्लांट को सील ठोंककर कार्रवाई कर दी। इससे "चंद्रपुर एक्सपोजर" द्वारा उजागर घोटाले पर प्रशासनीक मुहर लग गई है।

61 वर्षों से जारी चोरी का पर्दाफाश

सिंचाई विभाग के अनुसार दाताला पुल समीप के मनपा के वाटर प्लांट पर प्रति दिन 10 दस लाख लीटर (वार्षीक 3.65 द.ल.घ.मी.) पानी अनधिकृत तौर पर लिया जाता रहा है। जलसंपदा विभाग के साथ इसके लिये कोई करारनामा नहीं किया गया। कोई परमिशन नहीं ली गई। इस संदर्भ में चंद्रपुर मनपा को सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता की ओर से निरंतर सूचना पत्र भेजे गये। परंतु मनपा ने कोई प्रतिसाद नहीं दिया। प्लांट को सील करने की चेतावनी भी दी गई थी। इसका भी मनपा पर कोई असर नहीं हुआ। आखिरकार, शुक्रवार, 28 जनवरी को सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता व उनकी टीम ने प्लांट को सील ठोंक दिया। इसके पूर्व आखरी बार चंद्रपुर मनपा को सिंचाई विभाग की ओर से 11 जनवरी 2022 को पत्र भेजकर सूचना दी गई थी। साथ ही 276.81 लाख रुपये अदा करने की चेतावनी दी थी। दोबारा 25 जनवरी को सूचना देने के बाद 28 जनवरी को प्लांट सील कर दिया गया। यह जानकारी सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता श्यामसुंदर काले ने दी।

चुराये पानी पर भी जनता से वसूल रहे थे पूरा टैक्स !

मनपा प्रशासन की ओर से हर वर्ष चंद्रपुर वासियों से पानी कर के नाम पर 2 करोड़ 56 लाख से अधिक का कर वसूला जाता है। जबकि कुल पानी खपत में से 80 प्रतिशत पानी इरई बांध का होता है। शेष 20 प्रतिशत पानी इरई नदी से लिया जाता है। मनपा की ओर से इरई बांध का पानी टैक्स सिंचाई विभाग को अदा किया जाता है। किंतु इरई नदी का टैक्स नहीं दिया जाता। मतलब साफ है कि 20 प्रतिशत जल चुराकर उस पर मनपा टैक्स वसूल कर रही है। एक अनुमान के अनुसार मनपा प्रशासन चोरी के जल पर जनता से हर साल करीब 51.23 लाख रुपये का टैक्स वसूल कर रही है। अनेक बार तो जो नागरिक टैक्स नहीं देता, उसका नल कनेक्शन काट दिया जाता है। परंतु यही मनपा इरई नदी का टैक्स अदा नहीं करतीं।

हर माह 304167 घन मीटर पानी लिफ्ट

बीते 61 सालों से दाताला मार्ग के इरई नदी तट पर व जगन्नाथ बाबा मठ से सटा वॉटर प्लांट अविरत शुरू है। यहां आज भी 100 अश्वशक्ति वाले 3 मोटरपंप लगे हैं। नदी में मौजूद 3 विशाल कुओं से पानी लिफ्ट किया जा रहा था। 2 पाइप लाइन के माध्यम से हर साल 3.65 दलघमी अर्थात हर माह 304167 घन मीटर पानी लिफ्ट किया जा रहा था। 2 पाइप लाइन के माध्यम से यह पानी चंद्रपुर शहरवासियों के नलों तक पहुंचाया जाता रहा था।


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